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विभागीय जाँच एवं अनुशासनिक कार्यवाही — सम्पूर्ण मार्गदर्शिका

पहले नियम, फिर उत्तर, फिर केस-लॉ। निलंबन, आरोप-पत्र, चेतावनी बनाम परिन्दा, चार्जशीट का जवाब, और सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक निर्णय — 8 अध्यायों में।

JF JipshaFinserv · August 18, 2026

सरकारी सेवा में अनुशासनिक कार्यवाही जटिल है। यह मार्गदर्शिका उत्तर प्रदेश शासन के जुलाई 2022 के मार्गदर्शन और सुप्रीम कोर्ट / हाई कोर्ट के ऐतिहासिक निर्णयों को पढ़ने के क्रम में बाँटती है — पहले प्रक्रिया, फिर व्यावहारिक उत्तर, फिर केस-लॉ।

कैसे पढ़ें

विषय-सूची — अध्याय पर जाएँ

भाग A

A

प्रक्रिया — नियम पहले

जाँच कैसे चले, क्या वर्जित है, और चेतावनी दंड नहीं है
01

क्या किया जाना चाहिए

12 पाठ · Do's

पाठ 1.1

निलंबन कब करें?

किसी भी सरकारी सेवक का निलंबन तभी किया जाना चाहिए जब आरोप इतने गम्भीर हों कि मेजर पेनल्टी की सम्भावना हो। यदि प्रथम दृष्टया माइनर पेनल्टी पर्याप्त लगे, तो निलंबन उचित नहीं है।

निलंबन दंड नहीं है — यह जाँच की निष्पक्षता का उपकरण है। इसका प्रयोग विवेक से करें।

पाठ 1.2

जाँच अधिकारी की नियुक्ति

  • जाँच अधिकारी आरोपित कार्मिक से वरिष्ठ पद का हो।
  • वह जाँच से सम्बन्धित स्थान पर तैनात हो; पदनाम स्पष्ट लिखें।
  • एक ही घटना से जुड़े सभी कार्मिकों की जाँच एक ही अधिकारी से करायें — प्रकरण के उच्चतम पदधारी के अनुरूप।

पाठ 1.3

आरोप-पत्र का स्वरूप

  • आरोप-पत्र शीघ्र निर्गत करें।
  • आरोप स्पष्ट एवं संक्षेप में लिखें।
  • आरोप-पत्र अनुशासनिक प्राधिकारी द्वारा अनुमोदित और हस्ताक्षरित — दोनों — हो।
  • यदि नियुक्ति प्राधिकारी श्री राज्यपाल हैं, तो विभाग के अपर मुख्य सचिव / प्रमुख सचिव / सचिव अनुमोदन कर सकते हैं।

पाठ 1.4

उचित अवसर दें

  • रक्षा-पक्ष के साक्ष्यों तक पहुँच सुनिश्चित करें।
  • अभिलेखों के निरीक्षण का अवसर दें।
  • लिखित स्पष्टीकरण के लिए 15 दिन से एक माह दें।
  • अभिलेखों की स्वीकार्यता पर आपत्ति का अवसर दें।
  • पक्ष प्रस्तुत करने का reasonable अवसर दें।

पाठ 1.5

गवाहों के बयान

  • आरोपों से इनकार हो तो प्रस्तावित साक्षियों को बुलाएँ
  • बयान आरोपित अधिकारी की उपस्थिति में लें।
  • बयान शपथ के बाद ही लें।
  • पहले अभियोजन साक्षी, फिर प्रतिरक्षा साक्षी।
  • किसी साक्षी को न बुलाने पर लिखित कारण दें।

पाठ 1.6

ऑर्डर शीट

सम्पूर्ण कार्यवाही की ऑर्डर शीट तैयार करें। आरोपी, जाँच अधिकारी और साक्षियों के हस्ताक्षर करायें। जाँच आख्या के साथ इसे अनुशासनिक प्राधिकारी को भेजें।

पाठ 1.7

आख्या से असहमति

  • असहमति के कारण सहित निष्कर्ष अभिलिखित करें।
  • आरोपित से दो सप्ताह में उत्तर माँगें।

पाठ 1.8

लोक सेवा आयोग

नियुक्ति प्राधिकारी श्री राज्यपाल हों तो व्यक्तिगत दंडों पर PSC परामर्श आवश्यक है। यदि दंडादेश राज्यपाल से भिन्न प्राधिकारी पारित करे, तो PSC परामर्श आवश्यक नहीं — भले नियुक्ति PSC से हुई हो।

पाठ 1.9

एक से अधिक दंड

  • पृथक-पृथक आदेश न निकालें — एक ही आदेश में सभी दंड लिखें।
  • आदेश सदैव मुखरित (speaking order) हो।

पाठ 1.10

सेवानिवृत्ति के बाद लम्बित जाँच

  • जाँच CSR अनुच्छेद 351-A के तहत पेंशन कटौती के लिए जारी रह सकती है।
  • इसके लिए पृथक आदेश निर्गत करें।

पाठ 1.11

समय सीमा

घटना 4 वर्ष से अधिक पुरानी नहीं होनी चाहिए।

पाठ 1.12

Dismissal बनाम Removal

  • Dismissal: भविष्य की सरकारी सेवा के लिए अयोग्य।
  • Removal: पुनः आवेदन सम्भव।
  • दोनों दंड केवल नियुक्ति प्राधिकारी दे सकते हैं।
↑ विषय-सूची
02

क्या नहीं किया जाना चाहिए

8 पाठ · Don'ts

पाठ 2.1

स्पष्टीकरण के लिए दो माह से अधिक न दें

सामान्यतः आरोपित को अपना स्पष्टीकरण देने के लिए दो माह से अधिक समय न दें।

पाठ 2.2

स्थायी वेतन-वृद्धि रोक पर अवधि न लिखें

वेतन वृद्धि संचय या स्थायी प्रभाव से रोकी जाए तो अवधि का अंकन न करें — यह स्थायी हानि है।

पाठ 2.3

चेतावनी दंड नहीं है

चेतावनी नियम 3 की शास्तियों में नहीं है। नियम 7 में मेजर पेनल्टी; नियम 10 में माइनर पेनल्टी में से एक। चेतावनी को दंड के रूप में देना अनुचित है। विस्तार: अध्याय 3

पाठ 2.4

समाप्त मामला पुनः न खोलें

दंड देकर या बिना दंड दिये मामला अंतिम रूप से समाप्त हो जाए, तो उसी आधार पर पुनः कार्यवाही न करें।

पाठ 2.5

आरोप-पत्र में सतर्कता जाँच न लिखें

आरोप-पत्र में सतर्कता जाँच का उल्लेख न करें।

पाठ 2.6

दोहरी जाँच से बचें

मामला प्रशासनाधिकरण, सतर्कता अधिष्ठान या अपराध अनुसंधान विभाग को सौंपा हो तो विभागीय स्तर पर पृथक जाँच न करें। पहले से चल रही हो तो रोकें; अंतिम रिपोर्ट पर नियमानुसार आगे बढ़ें।

पाठ 2.7

दंडादेश से पहले अलग Show Cause आवश्यक नहीं

दंडादेश जारी करने के निमित्त पृथक शो-कॉज़ नोटिस की आवश्यकता नहीं है।

पाठ 2.8

दोषसिद्धि पर अपील की प्रतीक्षा न करें

  • न्यायालय की दोषसिद्धि पर दंड देते समय अपील की प्रतीक्षा न करें।
  • अपील दायर हो चुकी हो तो उसके निर्णय की भी प्रतीक्षा न करें।
  • समुचित दंडादेश तत्काल पारित करें।

एक नज़र में — करें / न करें

विषयकरेंन करें
निलंबनकेवल मेजर पेनल्टी की सम्भावना परमाइनर पेनल्टी वाले मामलों में
जाँच अधिकारीवरिष्ठ, सम्बन्धित स्थान पर तैनातआरोपी से कनिष्ठ
आरोप-पत्रस्पष्ट, संक्षिप्त, अनुमोदित व हस्ताक्षरितसतर्कता जाँच का उल्लेख
स्पष्टीकरण समय15 दिन – 1 माह2 माह से अधिक
चेतावनीप्रशासनिक उपायदंड के रूप में
दंडादेशएक आदेश, मुखरितपृथक-पृथक आदेश
Dismissal / Removalकेवल नियुक्ति प्राधिकारीनिम्न स्तर का अधिकारी
दोषसिद्धि पर दंडतत्काल आदेशअपील की प्रतीक्षा
↑ विषय-सूची
03

परिन्दा बनाम चेतावनी

Censure एक दंड है; Warning दंड नहीं है

दोनों शब्द सुनने में समान लगते हैं, लेकिन विधिक प्रकृति, प्रक्रिया और प्रभाव भिन्न हैं।

पाठ 3.1

चेतावनी — प्रशासनिक उपाय

  • यह दंड नहीं है। उद्देश्य सचेत करना है।
  • विभागीय जाँच आवश्यक नहीं — नियंत्रक / वरिष्ठ अधिकारी दे सकता है।
  • सामान्य चेतावनी का सेवा-लाभों पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ता।

पाठ 3.2

Recorded Warning

ACR में दर्ज चेतावनी प्रतिकूल प्रविष्टि बन जाती है। पदोन्नति प्रभावित हो सकती है। कर्मचारी अभ्यावेदन दे सकता है।

पाठ 3.3

परिन्दा — औपचारिक दंड

  • उत्तर प्रदेश सरकारी सेवक (अनुशासन एवं अपील) नियमावली 1999 के नियम 3 का लघु दंड।
  • विभागीय जाँच पूर्ण होने पर ही।
  • केवल सक्षम अनुशासनिक प्राधिकारी दे सकता है।

पाठ 3.4

तुलना

मापदंडचेतावनीपरिन्दा
प्रकृतिप्रशासनिकStatutory penalty
नियम 3 मेंनहींहाँ, लघु दंड
जाँचनहींहाँ
कौन देनियंत्रक / वरिष्ठकेवल सक्षम प्राधिकारी
सेवा-लाभसामान्यतः नहीं (ACR अपवाद)प्रतिकूल प्रभाव सम्भव
उपचारRepresentationअपील / पुनरीक्षण
चेतावनी = सचेत करना। परिन्दा = दंड देना।
↑ विषय-सूची

भाग B

B

व्यावहारिक — आरोपित क्या करे

चार्जशीट आने के बाद का क्रम
04

चार्जशीट का उत्तर कैसे दें

6 चरण · भाषा सरल और विनम्र रखें

घबराएँ नहीं — व्यवस्थित तैयारी करें।

पाठ 4.1

चरण 1 — दो-तीन बार पढ़ें

  • प्रत्येक आरोप अलग समझें: क्या, किस तिथि का, किस कृत्य से।
  • Statement of Imputation और अनुलग्नक भी पढ़ें।

पाठ 4.2

चरण 2 — कर्तव्यों से मिलान करें

  • आरोपित कमी वास्तव में आपके दायित्व में थी?
  • नहीं थी तो यही सशक्त बचाव बिन्दु है।

पाठ 4.3

चरण 3 — दस्तावेज़ क्रमबद्ध करें

  • कार्यालय आदेश, मैन्युअल में परिभाषित कर्तव्य, पत्राचार, रजिस्टर और रिपोर्ट।
  • इन्हें साक्ष्य के रूप में संलग्न करें।

पाठ 4.4

चरण 4 — संक्षिप्त उत्तर लिखें

1
संक्षेप। अनावश्यक विस्तार न करें।
2
एक आरोप, एक पैराग्राफ। Charge No. उसी क्रम में लिखें।
3
केवल तथ्य। भावना और आरोप-प्रत्यारोप से बचें।
4
Annexure No. प्रत्येक दावे के साथ दें।

पाठ 4.5

चरण 5 — भाषा

  • सरल और स्पष्ट।
  • विनम्र — असहमति हो तो भी।
  • उग्र भाषा न लिखें।
  • “सविनय निवेदन है कि…”, “सादर प्रस्तुत है कि…”
उत्तर बचाव का पहला अवसर है। भाषा और साक्ष्य ही दिशा तय करते हैं।

पाठ 4.6

चरण 6 — समय-सीमा में जमा करें

  • सामान्यतः 15 दिन (कभी 1 माह)।
  • अधिक समय चाहिए तो लिखित विस्तार माँगें।
  • बिना उत्तर समय बीतना deemed acceptance का जोखिम है।
चरणकार्यसावधानी
12–3 बार पढ़ेंप्रत्येक आरोप अलग
2कर्तव्यों से मिलानक्या आपका दायित्व था?
3दस्तावेज़ इकट्ठा करेंआदेश, मैन्युअल, पत्राचार
4संक्षिप्त उत्तरएक charge, एक पैरा
5सरल-विनम्र भाषाउग्रता नहीं
6समय पर जमाविलम्ब हानिकारक
↑ विषय-सूची

भाग C

C

केस-लॉ — न्यायालय ने क्या कहा

निलंबन, जेल अवधि, प्रोबेशन, विलम्ब, समानांतर जाँच
05

निलंबन की 90-दिन सीमा

Ajay Kumar Choudhary vs Union of India · 16 फरवरी 2015

पाठ 5.1

तथ्य

अजय कुमार चौधरी, Defence Estate Officer (कश्मीर सर्कल)। 30 सितम्बर 2011 को निलंबन — 2011 से 2014 तक बिना चार्जशीट। CAT और दिल्ली हाई कोर्ट के बाद सुप्रीम कोर्ट: न्यायमूर्ति विक्रमजीत सेन और सी. नागप्पन।

पाठ 5.2

न्यायालय की टिप्पणी

लम्बी अवधि का निलंबन अपवाद नहीं, सामान्य प्रथा बन चुकी है। यह गरिमा तोड़ता है।
आरोप सिद्ध होने से पहले समाज की नज़र में अपराधी बनाना न्याय के मूल सिद्धान्त के विपरीत है।

पाठ 5.3

कानूनी आधार

आधारसिद्धान्त
अनुच्छेद 21Speedy Trial मौलिक अधिकार
CrPC 167(2)90 दिन से अधिक बिना चार्जशीट जेल नहीं — यही निलंबन पर
ECHR / Magna Cartaअनिश्चितकालीन न्याय-वंचना अस्वीकार्य

पाठ 5.4

चार निर्देश

1
3 महीने। चार्जशीट न हो तो निलंबन स्वतः समाप्त।
2
बहाली। आरोप-पत्र न हो तो reinstate करें।
3
Reasoned order बिना निलंबन न बढ़ाएँ।
4
स्थानांतरण विकल्प है; अनिश्चित घर बैठाना नहीं।

निलंबन सीमित होना चाहिए, न्याय असीमित।

↑ विषय-सूची
06

जेल अवधि में जीवन निर्वाह भत्ता

Ashok Kumar Tiwari vs Chairman, UPPCL · 20 मई 2004

निलंबित कर्मचारी जेल चला जाए तो जेल अवधि का Subsistence Allowance मिलेगा या नहीं?

पाठ 6.1

घटनाक्रम

अशोक कुमार तिवारी, UPPCL क्लर्क।

तिथिघटना
19 नवम्बर 1998कार्यालय आना बंद
21 नवम्बर 1998धारा 302 IPC — गिरफ्तारी, जेल
1 दिसम्बर 1998निलंबन आदेश
16 अगस्त 1999दोषमुक्ति
30 अगस्त 1999बहाली आवेदन
7 सितम्बर 1999कार्यभार ग्रहण

पाठ 6.2

माँग

तिवारी जी ने पूरी अवधि का पूर्ण वेतन माँगा क्योंकि दोषमुक्ति हो गयी। महाप्रबंधक ने Leave Without Pay दिया।

पाठ 6.3

Fundamental Rules

FR 53
Deemed suspension: 48 घंटे से अधिक अभिरक्षा स्वतः निलंबन है।
FR 54-B
निलंबन समाप्ति पर प्राधिकारी तय करे पूरा/आंशिक वेतन — लेकिन FR 53 के भत्ते से कम नहीं।

पाठ 6.4

आदेश

जेल अवधि का जीवन निर्वाह भत्ता दिया जाए।
अवधिस्थितिदेय
गिरफ्तारी से पहलेअनुपस्थितिLWP / अर्जित अवकाश — विवेक पर
जेल (48 घंटे+)Deemed suspensionन्यूनतम subsistence
छूटने से कार्यभार तकनिलंबन / बहालीभत्ता या अवकाश — विवेक पर
दोषमुक्ति के बाद पूरी अवधिFR 54-Bपूर्ण वेतन अनिवार्य नहीं

दोषमुक्ति का अर्थ स्वतः पूर्ण वेतन नहीं। जेल अवधि में subsistence से कम नहीं दिया जा सकता।

↑ विषय-सूची
07

प्रोबेशनर डिस्चार्ज बनाम दंडात्मक बर्खास्तगी

State of Punjab vs Jaswant Singh

पाठ 7.1

तथ्य

जसवंत सिंह, पंजाब पुलिस कांस्टेबल, प्रोबेशन पर (12 नवम्बर 1989)। अमृतसर ड्यूटी के बाद बिना सूचना अनुपस्थित। SSP ने Punjab Police Rules 1934, Rule 12.21 से 28 मार्च 1991 को डिस्चार्ज किया:

Not likely to become an efficient police officer.

पाठ 7.2

विवाद

कर्मचारी: बीमारी, मेडिकल सर्टिफिकेट, सुनवाई नहीं, Natural Justice। Trial Court, Appellate Court और High Court कर्मचारी के पक्ष में। सुप्रीम कोर्ट ने तीनों पलट दिये।

पाठ 7.3

Motive vs Foundation

परीक्षणअर्थपरिणाम
MotiveConduct केवल suitability आँकने के लिएSimpliciter — बिना inquiry वैध
FoundationMisconduct सिद्ध कर दंडPunitive — inquiry अनिवार्य

पाठ 7.4

आदेश की भाषा

Stigmatic (अमान्य)Simpliciter (मान्य)
Dishonest, CorruptNot suitable
Guilty, Misconduct provedNot likely to become efficient
Moral turpitudeUnsatisfactory performance

पाठ 7.5

पाँच पाठ प्राधिकारियों के लिए

1
पहले तय करें — unsuitability या misconduct?
2
Misconduct सिद्ध करना हो तो regular inquiry अनिवार्य।
3
Suitability आदेश सावधानी से ड्राफ्ट करें।
4
Stigmatic शब्द न लिखें।
5
Motive और foundation का अंतर समझे बिना आदेश न दें।

पाठ 7.6

कर्मचारियों को

प्रोबेशन में समयनिष्ठा, अनुशासन, व्यवहार, उत्तरदायित्व और प्रशिक्षण की रुचि सब देखी जाती है।

बिना inquiry कोई action नहीं — यह प्रोबेशन पर हमेशा सत्य नहीं। Unsuitable माने जाने पर simpliciter discharge विधि-सम्मत हो सकता है।

↑ विषय-सूची
08

विलम्बित जाँच और समानांतर कार्यवाही

दो निर्णय · दो अलग प्रश्न

पाठ 8.1

10 वर्ष बाद चार्जशीट — PV Mahadevan (2005)

तमिलनाडु हाउसिंग बोर्ड के Superintendent Engineer ने 1990 में Sale Deed जारी किया। 2000 में चार्जशीट। विभाग ने 1994–95 ऑडिट का हवाला दिया। न्यायालय: वार्षिक ऑडिट होना चाहिए था; कुल 10 वर्ष अनुचित।

वर्षों तक आरोप लटकाना मानसिक अत्याचार के समान है।

आदेश: चार्जशीट रद्द; सेवानिवृत्ति लाभ तीन महीने में।

1
Delay defeats justice. बिना कारण की देरी अवैध हो सकती है।
2
मानसिक यातना स्वयं दंड है।
3
कार्यवाही समयबद्ध रखें।

सन्दर्भ: State of MP vs Bani Singh (1990); State of AP vs N. Radhakrishnan (1998)।

पाठ 8.2

Criminal case चल रहा हो तो विभागीय जाँच? — KVS vs T. Srinivas (2004)

UDC टी. श्रीनिवास को CBI ने ₹200 रिश्वत पर पकड़ा। CAT और हाई कोर्ट ने विभागीय जाँच रोक दी। सुप्रीम कोर्ट ने रोक हटा दी।

विभागीय जाँचआपराधिक मुकदमा
आचरण नौकरी योग्य है या नहींअपराध सिद्ध करना
Preponderance of probabilityBeyond reasonable doubt
विभाग चलाता हैन्यायालय चलाता है
1
दोनों parallel चल सकती हैं — यह नियम है; रोकना अपवाद।
2
केवल तब रोकें जब बचाव गम्भीर रूप से प्रभावित हो।
3
हर बार जाँच रोकना अनुशासन कमज़ोर करता है।

सन्दर्भ: State of Rajasthan vs B.K. Meena (1996); Capt. M. Paul Anthony vs Bharat Gold Mines Ltd. (1999)।

अनुशासन किसी मुकदमे का मोहताज नहीं होता।

↑ विषय-सूची
+

परिशिष्ट — UPPCL

Discipline and Appeal Regulations, 2020

UPPCL और DISCOM कर्मचारियों की कार्यवाही Uttar Pradesh Power Corporation Limited Personnel (Discipline and Appeal) Regulations, 2020 से शासित है।

विनियमविषय
Regulation 6नियुक्ति प्राधिकारी ही अनुशासनिक प्राधिकारी
Regulation 7पहले निगम के साक्षी, फिर प्रतिरक्षा
Regulation 13पुनरीक्षण — Chairman, UPPCL
OM 14.08.2023Oral evidence अनिवार्य

UPPCL ERP User ManualsHRM_PA-15 Disciplinary Proceedings और HRM_PA-12 Suspension and Revoke

न्याय में अनुशासन होना चाहिए, पर अनुशासन में न्याय का अभाव नहीं होना चाहिए।

↑ विषय-सूची